इश्क़ तेरा बड़ा है पाकीज़ा..

     "पालिका समाचार" उर्दू में प्रकाशित अपनी ये शुरूआती ग़ज़ल थोड़ी सी तबदीली के साथ..ये उसमें जमशेद अख़्तर नाम से छपी थी 💐

इश्क़ तेरा बड़ा है पाकीज़ा
मेरे दिल को किया है पाकीज़ा

तेरा चेहरा है चाँद सा रौशन
और सर पे घटा है पाकीज़ा

मुझको लगने दो बस मोहब्बत की
ये हवा तो हवा है पाकीज़ा !!

क्यों है इतनी ये हम में नापाकी
जब हमारा ख़ुदा है पाकीज़ा !!

लड़खड़ाने दो इश्क़ में मुझको
इक यही तो नशा है पाकीज़ा

चलो माना है गंदगी मुझ में
तेरा क्या-क्या बता है पाकीज़ा

मेरी पगड़ी भी उड़ गई पाकी
तेरा सर भी खुला है पाकीज़ा

क्यों न उसपे लुटाए जान 'जेहद'
जो सदा ही रहा है पाकीज़ा !!

     ~जावेद जेहद

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