हम जो मिलते तो क्या नहीं होता..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
हम जो मिलते तो क्या नहीं होता
ये मगर फ़ासला नहीं होता !!
कहते फिरते सभी हमारे लिए
जोड़ ये तो जुदा नहीं होता !!
है ये कैसी तुम्हारी क़ैद सनम
कोई इससे रिहा नहीं होता !
अब अगर हम कभी मिलें न मिलें
किसी को भी गिला नहीं होता !!
बेमज़ा होती वो तो प्रेम कथा
उसमें गर तीसरा नहीं होता !
उसे भी मिलता है मक़ाम बड़ा
जो किसी काम का नहीं होता
सारे अश्आर को सराहूं मैं क्यों
शेर सारा भला नहीं होता !!
शायरी कितनी लगती सीधी सी
इसमें गर फ़लसफ़ा नहीं होता
फ़ैसला आपका हमेशा ही क्यों
किसी भी काम का नहीं होता !
दिल जिसे चाहता है वो तो 'जेहद'
जैसा भी हो, बुरा नहीं होता !!
~जावेद जेहद
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