टूटे-फूटे खंडरों में दिन बिताना याद है..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
टूटे-फूटे खंडरों में दिन बिताना याद है
बंदरों सा हर घड़ी उद्धम मचाना याद है
नदियों की धाराओं में अपने सभी यारों के संग
मस्तियों में दूर तक बहते ही जाना याद है !!
जो हमारे दस्तरस में भी नहीं थी उन दिनों
उन उड़ानों के लिए भी फड़फड़ाना याद है
देख कर कोई हसीना का हसीं हुस्न-ओ-जमाल
उसके ख़्यालों में हसीं ग़ोते लगाना याद है !!
एक ऐसा भी ज़माना था हमारा दोस्तो
हर घड़ी रूमानी गाना गुनगुनाना याद है
काम वो, जिनको मना करते थे जितना लोग सब
उतना ही उस काम को करते ही जाना याद है !!
लुक्का-चोरी, गिल्ली-डंडा, लड़ना-भिड़ना, छेड़-छाड़
सब उछलना-कूदना, गप्पेंं-लड़ाना याद है !!
हर परब-त्योहार के आने से पहले ही 'जेहद'
उसकी ख़ुशियों के नशे में डूब जाना याद है
~जावेद जेहद
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