कितनी करें और कब तलक जद्दोजहद..

     ताज़ा ग़ज़ल 💐

कितनी करें और कब तलक जद्दोजहद
है जब ज़मीं से ता-फ़लक जद्दोजहद !!

कर आख़िरी तू सांस तक जद्दोजहद
है ज़िंदगी की ये चमक जद्दोजहद !!

हर वक़्त सुब्ह-ओ-शाम तक जद्दोजहद
क्या होगी इतनी भी अथक जद्दोजहद ?

गर चूड़ियों की है खनक जद्दोजहद
तो पायलों की भी छनक जद्दोजहद

मेरी सही से कट रही है ज़िंदगी
शायद सही की अब तलक जद्दोजहद

साबित क़दम तू रहना मेरे साथ ही
जाना कभी तू न बहक जद्दोजहद

आता मज़ा है जाम तेरा पीने में
भर-भर के तू हरदम छलक जद्दोजहद

महरूम हैं जो कामयाबी से तिरी
जीवन में उनके भी महक जद्दोजहद

ये शायरी भी चाहे है मेहनत कड़ी
इसमें 'जेहद' तो हो अथक जद्दोजहद

    ~जावेद जेहद

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