ख़ुद भी सुधरो, सुधार दो सबको

       ताज़ा ग़ज़ल 💐
2122 1212 22/112

ख़ुद भी सुधरो, सुधार दो सबको
वर्ना साहब  बिगाड़ दो सबको !

ये लड़ाने से सबको अच्छा है
एक ही बार मार दो सबको !

आज इसकी बहुत ज़रूरत है
खोल के दिल को प्यार दो सबको

सिर्फ़ अपनी ही मौज मत देखो
ज़िंदगी की बहार दो सबको !!

फिर कभी भी बिगड़ न पाए कोई
इस तरह से सँवार दो सबको !!

बेवजह जो चढ़े हैं सर तेरे
हो सके तो उतार दो सबको

सब 'जेहद' मस्त-मस्त हो जाएं
यूँ सुख़न का ख़ुमार दो सबको

    ~जावेद जेहद

Comments

Popular posts from this blog

जब बुरे दिन उमड़ने लगते हैं..

न पूछो ग़ज़ल से मुझे क्या मिला है..

जावेद जहद की पाँच ग़ज़लें..