वो मोहब्बत का बाग़ मिलता नहीं..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
वो मोहब्बत का बाग़ मिलता नहीं
ढूंढता हूँ सुराग़ मिलता नहीं !!
चेहरे मिलते तो हैं हसीं अब भी
दिल मगर बाग़-बाग़ मिलता नहीं
ये हमारी भी कैसी क़िस्मत है
हमें ग़म से फ़राग़ मिलता नहीं
हम भी बदकार हैं मगर तेरे
दाग़ से अपना दाग़ मिलता नहीं
हम उधर भागने लगे हैं जहाँ
रौशनी का चराग़ मिलता नहीं
दिल मिरा मिल गया उसे फिर भी
मेरे ग़म का सुराग़ मिलता नहीं !!
ऐसा क्या मिल गया तुम्हें भी 'जेहद'
जो तुम्हारा दिमाग़ मिलता नहीं !!
करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया
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