खिले है ऐसे वो सुंदर गुलाब आहिस्ता आहिस्ता..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐

खिले है ऐसे वो सुंदर गुलाब आहिस्ता आहिस्ता
कि चढ़ती जाए है जैसे शराब आहिस्ता आहिस्ता

ये चढ़ते चाँद सूरज हों या खिलते फूल और कलियाँ
कि आता है तो इनपर भी शबाब आहिस्ता आहिस्ता

जो नाज़ुक हैं कली से भी हमेशा आप भी उनसे
मिलो थोड़ी नज़ाकत से जनाब आहिस्ता आहिस्ता

लगे है आग सीने में मोहब्बत की तो तेज़ी से
बरसता है ये फिर क्यों प्यारा आब आहिस्ता आहिस्ता

ये कैसे दुनिया वाले हैं जो इतनी अच्छी दुनिया को
करे हैं होशियारी से ख़राब आहिस्ता आहिस्ता !!

ज़रा ठहरो अभी तुम कुछ न बोलो जल्दबाज़ी में
करो मेरी कला का तो हिसाब आहिस्ता आहिस्ता

'जेहद' ये तो ज़मीं प्यारी कहीं से होके अब हम तक
चली आई मोहब्बत में जनाब आहिस्ता आहिस्ता !!

        ~जावेद जेहद

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