है सफ़र दश्त-ए-बला का सोच ले..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
है सफ़र दश्त-ए-बला का सोच ले
रास्ता कोई बक़ा का सोच ले ।
होगा क्या वादा वफ़ा का सोच ले
बेवफ़ा है वो सदा का सोच ले ।
सोचता हूँ ज़ीस्त का अंजाम मैं
तू भी अपना दिन फ़ना का सोच ले
आन में रहता है जो भी हर घड़ी
होता क्या उसकी अना का सोच ले
अपना रस्ता चलता जा तू ठीक है
रुख़ किधर का है हवा का सोच ले
हद से ज़्यादा अब न रख उम्मीद तू
काम क्या है रहनुमा का सोच ले !!
ज़ुल्म की आँधी जो यूँ चलती रही
होगा क्या शह्र-ए-वफ़ा का सोच ले
इस क़दर हम जो परेशाँ हाल हैं
मामला क्या है सज़ा का सोच ले
फ़िक्र दुनिया की 'जेहद' तू छोड़ दे
काम अब उसकी रज़ा का सोच ले
~जावेद जहद
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