अभी तो दिल पे मिरा इख़्तियार बाक़ी है..

         ताज़ा ग़ज़ल

अभी तो दिल पे मिरा इख़्तियार बाक़ी है
अभी तो इश्क़ की सारी बहार बाक़ी है !

वो आएंगे तो लुटाएंगे  गुल वफ़ाओं के
किसी का दिल को मिरे इंतज़ार बाक़ी है

नज़र-नज़र में मोहब्बत की होंगी बरसातें
निगाह-ए-मस्त की मय की फुहार बाक़ी है

कोई तो दिल को मिरे आके कर दे दीवाना
कि होश वालों में अपना शुमार बाक़ी है !!

गया है जबसे पिला के वो जाम नज़रों से
मिरी इन आँखों में उसका ख़ुमार बाक़ी है

भले ही ज़िंदगी दुश्वार  हो गई सब की
पर अब भी इश्क़ का तो कारोबार बाक़ी है

कि जाओ चाँद से जाकर ये बोल देना 'जहद'
करेंगे हम जो तिरा वो सिंगार बाक़ी है !!

       ~ जावेद जहद

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