मेरे घर से तो बहुत दूर नगर है उसका..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
मेरे घर से तो बहुत दूर नगर है उसका
फिर भी हर वक़्त मिरे पास बसर है उसका
क्या हुआ, दिल को अगर छीन लिया है उसने
मेरे भी क़बज़े में तो यारो जिगर है उसका !!
मैं इधर होके भी अब जैसे उधर रहता हूँ
वो उधर को है मगर ध्यान इधर है उसका
अपनी ये राह जुदा हो गई तो क्या ग़म है
कल तलक था जो वही अब भी सफ़र है उसका
वो अजब शख़्स है, न जाने उसे क्या ग़म है
एक मुद्दत से ही दिल उजड़ा शहर है उसका
मेरे अश्आर में जो प्यार उमड़ आता है
ये तो मेरा नहीं, सच मानो असर है उसका
ये जो अफ़साना 'जहद' जिसने भी तहरीर किया
इसमें वो है तो नहीं, क़िस्सा मगर है उसका !!
~ जावेद जहद
Comments