दो ग़ज़ल छोटी बहर में..

      1..ग़ज़ल 💐

सब आजकल
बस छल है छल

ये ज़िंदगी
अच्छी थी कल

हर मस्अला
कब होगा हल

हिम्मत है गर
अब सब बदल

आसान कर
कर पग सरल

सपनों से तू
अब मत बहल

दर्द-ओ-अलम
से अब निकल

सब मर गए
मर तू भी चल

छोटी बहर
अच्छी ग़ज़ल

बोले 'जहद'
अब तो सँभल
***********

2..ग़ज़ल 💐

फ़तह मेरी
कभी उसकी

है सारी ही
ख़ुशी वक़्ती

लदे हैं फल
झुकी टहनी

हसीं बातें
हैं सब उनकी

सियासत है
वही बिगड़ी

परेशानी
वही अब की

ये दुनिया है
ग़ज़ब रब की

'जहद' मुश्किल
बहर छोटी !!

 ~ जावेद जहद

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