वादा वफ़ा का तोड़ के जब वो गुज़र गया..

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वादा वफ़ा का तोड़ के जब वो गुज़र गया
ऐसा लगा कि सीने में ख़ंजर उतर गया !!

उसके सितम की बात न मुझसे जी पूछिए
मेरे वुजूद पर से समंदर गुज़र गया !!

उनको गले लगा के, मोहब्बत में खाके चोट
दिल लुट गया मगर ये मुक़द्दर सँवर गया !!

उनको जुदाई में तो ख़ुदा जाने क्या हुआ
मेरे जिगर से दर्द का लश्कर गुज़र गया !

अब चाहता हूँ फिर वही ठोकर लगे मुझे
अब सोचता हूँ हाए वो पत्थर किधर गया

माना कि साहिलों पे तो ख़तरा नहीं कोई
पर क्या करोगे तुम जो समंदर बिफर गया

दुनिया को स्वर्ग जैसा बनाने के फेर में
क्या-क्या बिगड़ गया यहाँ, क्या-क्या सँवर गया

बढ़ती उमर के साथ 'जहद' फ़िक्र यूँ बढ़ी
इस दिल से मस्तियों का नशा ही उतर गया

        ~ जावेद जहद

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