सुना है तेरा लोगों में बड़ा ही नाम है साक़ी..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
सुना है तेरा लोगों में बड़ा ही नाम है साक़ी
ज़रा सा हम भी तो देखें तिरा क्या जाम है साक़ी
तिरी आँखों से पीते ही ये दिल ग़म भूल जाता है
कि तेरे जाम में सचमुच बड़ा आराम है साक़ी
किसी का होश लेकर और ख़ुद को होश में रखना
जहाँ होता है दिल को शक यही वो गाम है साक़ी
नज़र का जाम हम दोनों तो मिलके साथ पीते हैं
हमीं पे किस लिए फिर हिर्स का इलज़ाम है साक़ी
नशे में देखिए रहने लगा सारा जहाँ डूबा
यहाँ हम मय-नशीनों का भी अब क्या काम है साक़ी
कहीं भी दिल नहीं लगता है जबसे उनसे बिछड़े हैं
अगर कुछ है सुकूँ तो तेरे ज़ेर-ए-बाम है साक़ी
तुम्हारे मयकदे की सारी रौनक़ है 'जहद' हम से
जहाँ बैठे तो हो जाती सुबह से शाम है साक़ी !!
~ जावेद जहद
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