सदा हलचल भरी रखिए..
ताज़ा ग़ज़ल
सदा हलचल भरी रखिए
लहर सी ज़िंंदगी रखिए !
कहानी मुख़्तसर में भी
कलाकारी बड़ी रखिए
बहारें आती रहती हैं
गली दिल की खुली रखिए
हो दुश्मन लाख लाग़र सा
नज़र उसपर कड़ी रखिए
उधर भी जुस्तजू होगी
तमन्ना ख़ुद में भी रखिए
ये जीवन चक्र जैसा है
रवानी ख़ुद में भी रखिए
हर इक घर का बदल कर नाम
अमन और आशिक़ी रखिए !!
बुरा ये दौर है साहब
नज़र को जागती रखिए
कोई भी हादसा गर हो
बहुत दिन न ग़मी रखिए
कहीं पे सादगी अच्छी
कहीं पे रंगिनी रखिए
'जहद' रौशन जहाँ होगा
सुख़न में रौशनी रखिए
~ जावेद जहद
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