ख़ुश्बू-ख़ुश्बू पवन से आती है..

       ताज़ा ग़ज़ल 💐

ख़ुश्बू-ख़ुश्बू पवन से आती है
गुलबदन किस चमन से आती है

जिस्म धरती का जब सुलगता है
तब ये बारिश गगन से आती है !

रूह रौशन हो जिसकी, उसके तो
रौशनी सी बदन से आती है !!

मयकदे की ये सारी सर-मस्ती
मुझको उनके नयन से आती है

याद आती हैं कितनी ही बातें
जब कोई शय वतन से आती है

क्या खिलेगा वफ़ाओं का गुलशन
ये खिलन तो मिलन से आती है !

प्यार ही प्यार हो 'जेहद' जिसमें
प्रीत उसके सुख़न से आती है !

    ~ जावेद जेहद

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