उनके रुख़ पे ज़ुल्फ़ों का ऐसे है लहराए बादल..

       ताज़ा ग़ज़ल 💐

उनके रुख़ पे ज़ुल्फ़ों का ऐसे है लहराए बादल
पर्वत की चोटी पर जैसे उमड़-उमड़ के छाए बादल

प्यार का सावन क्या होता है, क्या होती है प्रेम अगन
वो क्या जाने, जिसके दिल का दिल से न टकराए बादल

उनकी वफ़ा पे कर तो लिया है मैंने भरोसा ऐ यारो
डर है लेकिन उनके दिल पे जफ़ा का न छा जाए बादल

सुंदर तो है चाँद बहुत लेकिन उसकी सुंदरता को
छुपा-छुपा के, दिखा-दिखा के और भी है बढ़ाए बादल

सावन लाए भादो भी ये, सोना बरसाए चाँदी भी
और यही सैलाब कहीं, हरियाली कहीं पर लाए बादल

ऐ प्रेम-पवन, अब तो तू ही ज़ोर-ज़ोर से चलती जा
मुमकिन है तेरे चलते ही नफ़रत का छट जाए बादल

तेरी अदाएं देख के मुझको ऐसा लगता है कि 'जहद'
लहरा के, बलखा के जैसे बिजली है बरसाए बादल !

       ~ जावेद जहद

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