रुत आएगी बहार का तोहफ़ा लिए हुए..
ताज़ा ग़ज़ल
रुत आएगी बहार का तोहफ़ा लिए हुए
हम बैठे हैं उमीद की दुनिया लिए हुए !
उम्मीद है तो ज़िंदगी भी ज़िंदाबाद है
उम्मीद ही है ज़ीस्त का झंडा लिए हुए
झूमेगा, नाचे, गाएगा ये दिल तो ख़ूब ही
वो आएंगे जो प्यार का नग़्मा लिए हुए !
उस शख़्स की उदासी कोई क्या बयां करे
वो शख़्स है ग़मों का तो सहरा लिए हुए !
इंसान ही तो लाएगा इंसानियत के दिन
क्यों आएगा ये कोई फ़रिश्ता लिए हुए
कुछ ऐसी वस्तुएं हैं हिफ़ाज़त के नाम पर
जो हैं क़यामतों सा ही ख़तरा लिए हुए !!
हर शौक़ किसका पूरा हुआ है यहाँ भला
हम भी चले ही जाएंगे सपना लिए हुए !!
शायर मुझे न समझो ज़रा भी नया-नया
अर्सा हुआ है इसमें तो हिस्सा लिए हुए
आते हैं कितने लोग 'जहद' रोज़ ही यहाँ
आते मगर हैं कम ही करिश्मा लिए हुए
~ जावेद जहद
Comments