उमड़ते प्यार का नग़्मा, बरसते प्यार का नग़्मा..

50 Ghazals..
दोस्तो ! पेशे-ख़िदमत है इस साइट की पचासवीं ग़ज़ल.. अभी आपलोगों को यहाँ मेरी काफ़ी रचनाएं पढ़ने को मिलेंगी.. सहयोग बनाए रक्खें.. टीका-टिप्पणी भी करते रहें..शुक्रिया 💐

        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐

उमड़ते प्यार का नग़्मा, बरसते प्यार का नग़्मा
लब-ए-दिलदार से सुनना, गुल-ए-गुलज़ार का नग़्मा

कभी लगता है बस अपना ही अपने प्यार का नग़्मा
कभी होता गुमां वो सारे ही संसार का नग़्मा !!

कभी मामूली सी शय के लिए इंकार का नग़्मा
कभी दिल्लो-जिगर और जिस्म-ओ-जाँ बौछार का नग़्मा

ये बे-आधार सा लगता है डिस्को, भांगड़ा जैसे
ये ठुमरी, भैरवी, मलहार है आधार का नग़्मा !!

हमेशा गूँजा करता है तराना अपनी धरती का
मगर दम तोड़ देता है समंदर पार का नग़्मा !!

हक़ीक़त है ये फ़िल्मों की बहुत दिन से यही यारो
कहानी बे-सर-ओ-पा और ये बेकार का नग़्मा !!

चहकते प्यार का नग़्मा सभी को हम सुनाते थे
सुनाएं किसको अब अपने दिल-ए-बीमार का नग़्मा

मोहब्बत चोट खाई तो हमारे दिल से भी निकला
बड़े ही दर्द में डूबा ग़म-ए-दिलदार का नग़्मा !!

कभी तो हर घड़ी वो प्यार के ही गीत गाते हैं
कभी तकरार पे तकरार, बस तकरार का नग़्मा

ग़ज़ल से इसलिए मुझको 'जेहद' इतनी मोहब्बत है
है मेरे यार ये तो ज़िंदगी के तार का नग़्मा !!

        ~ जावेद जहद

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