फूल जैसी कभी खिले दुनिया..
ताज़ा ग़ज़ल
फूल जैसी कभी खिले दुनिया
कभी पतझड़ नुमा लगे दुनिया
जाने क्या हो गया है दुनिया को
बुरे को भी भला कहे दुनिया !!
कितने रोगों को ख़ुद ही पाला है
बैठ के अब दवा करे दुनिया !!
आसमां ढाता ही रहेगा क़हर
मरती है तो मरा करे दुनिया !
सहती आई है ये अज़ल से ही
और कितना सितम सहे दुनिया
इसके जैसी बुराई हो न वहाँ
अब अगर दूसरी बसे दुनिया
फ़िक्र जिनको नहीं है दुनिया की
उनके पीछे न ये चले दुनिया !!
है तरक़्क़ी पे कितनी राज़ खुले
जब मुसीबत में ये फंसे दुनिया
हाल कैसा है जग का क्या बोलें
एक दूजे पे सब हँसे दुनिया !!
कैसे होगा सुधार दुनिया में
कितना हंगामा और करे दुनिया
अब 'जेहद' छोड़े न सभी उनपर
फैसला ख़ुद भी कुछ करे दुनिया
~ जावेद जहद
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