अब तो ऐसे पिघल गया सूरज..
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अब तो ऐसे पिघल गया सूरज
जैसे हर फ़न का ढल गया सूरज
आग ऐसी लगी ज़माने में
उसके शोलों में जल गया सूरज
चाँद कोई नदी में उतरा था
देखते ही मचल गया सूरज
चाँद और तारे खो गए खुद में
जो फ़लक से निकल गया सूरज
देख कर रौशनी नई जग में
ग़ार में बैठा जल गया सूरज !
दाग़ तो दुनिया पर ही कम न थे
अपने रुख़ पर भी मल गया सूरज
शह्र की रात यूँ दमकती है
जैसे खम्भों में फल गया सूरज
इतना ग़ुब्बार फैला है कि 'जहद'
उसका कोहरा निगल गया सूरज
~ जावेद जहद
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