चाँद, तारों की चाह की जाए..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
चाँद, तारों की चाह की जाए
ख़ुशनज़ारों की चाह की जाए
ख़ुशनसीबों पे जान क्या देना
ग़म के मारों की चाह की जाए
फूंक दी जाए कुछ नमी दिल की
कुछ शरारों की चाह की जाए !!
आग-शोलों के रेगज़ारों में
आबशारों की चाह की जाए
बा-सहारों का साथ क्या देना
बे-सहारों की चाह की जाए !
तब ख़िज़ाँ को भी ध्यान में रक्खें
जब बहारों की चाह की जाए !!
दुश्मन-ए-जाँ से फेर कर आँखें
जाँ-निसारों की चाह की जाए !
भाई-चारे की हो या उलफ़त की
शुद्ध धारों की चाह की जाए !!
चंद लोगों का दोस्ताना क्या
सौ-हज़ारों की चाह की जाए
हद से बढ़ जाए बेक़रारी जब
तब क़रारों की चाह की जाए
छोड़ कर अब तो सारा हंगामा
बस इशारों की चाह की जाए
शेर-गोई में अब 'जहद' आओ
नव-विचारों की चाह की जाए
~ जावेद जहद
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