ये चाँद तो बेशक मेरा है..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
ये चाँद तो बेशक मेरा है
मुझमें ही इसका डेरा है
ये चाँद सा रुख़, नीली आँखें
क्या रूप सुहाना तेरा है !!
ये रात नुरानी है जानम
या तेरे बदन का फेरा है
कोई यूँ ही नहीं ग़ज़ल कहता
मौसम ने मुझे आ घेरा है !!
ग़ज़लें हैं मेरा घर-आंगन
ग़ज़लों में मेरा बसेरा है !
इश्क़ में तेरे, नाम तुम्हारा
किस शय पे न हमने उकेरा है
जी भर के हमें तुम मिलने दो
चले जाना, अभी तो सवेरा है
मुझको काहे का ख़ौफ़ 'जहद'
मन मेरा तो ये सपेरा है !!
~ जावेद जहद
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