ये बम धमाकों का मंज़र बहुत भयानक है..
ताज़ा ग़ज़ल
ये बम धमाकों का मंज़र बहुत भयानक है
लहू-लहू का समंदर बहुत भयानक है !!
उड़ाई जैसे है जिस्मों की धज्जियां बम से
कहा ये जाए सितमगर बहुत भयानक है
ये हादसात, फ़सादात, रोज़ की मौतें
कि अब तो ज़िंदगी यकसर बहुत भयानक है
ये ख़ूनी चेहरे, ये शैतानी हरकतों वाले
कि इनका काम तो हर-हर बहुत भयानक है
उदासी फैली है चारों तरफ़ ही अब ऐसे
कि लगता सबका ही घर-घर बहुत भयानक है
कोई कहे तो कहे तुझको क़ौम का रहबर
मैं ये कहूँ तिरा लश्कर बहुत भयानक है !
कहीं से देखो तो दिलकश दिखाई देता है
कहीं पे धरती का मंज़र बहुत भयानक है
ये नफ़रतें, ये अदावत, ये क़त्ल-ओ-ग़ारत का
सभी के वास्ते ख़ंजर बहुत भयानक है !!
किसी को जैसे किसी से कोई ग़रज़ ही नहीं
किसी का देखो तो चक्कर बहुत भयानक है
वो जो भी ख़ून की नदियां बहाता है नाहक़
वो वाक़ई में सितमगर बहुत भयानक है !!
कोई हमेशा हसीं ख़्वाब देखता है 'जहद'
किसी ने देखा ये अक्सर बहुत भयानक है
~ जावेद जहद
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