न लड़ाई न मार करने की..

     ताज़ा ग़ज़ल

न लड़ाई न मार करने की
चीज़ हो तुम तो प्यार करने की

न डरो ग़म के तुम थपेड़ों से
ये नदी तो है पार करने की

कुछ हैं चीज़ें सहेजने वाली
और कुछ हैं निसार करने की

मौसम-ए-ग़म ही सीख देता है
ज़िंदगी ख़ुशगवार करने की

थक गए कुछ तो कुछ ने ठानी है
दश्त-ओ-सहरा बहार करने की

घुट गया दम ही क्या ज़रूरत थी
वार पे और वार करने की ?

कुछ को धुन है 'जहद' हमेशा ही
बस यूँ ही ख़लफ़िशार करने की

     ~ जावेद जहद

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