मिरे हमसफ़र मिरे साथ चल, अभी मंज़िलें बड़ी दूर हैं..

        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐

मिरे हमसफ़र मिरे साथ चल, अभी मंज़िलें बड़ी दूर हैं
अभी हम चले हैं तो कुछ ही पल, अभी मंज़िलें बड़ी दूर हैं

ये जो रास्ते हैं वफ़ाओं के, बड़े सख़्त और कठिन भी हैं
तू ये शौक़ में अभी और ढल, अभी मंज़िलें बड़ी दूर हैं !

शब-ए-वस्ल पे अभी ख़ुश न हो कि ये लाती है कभी हिज्र भी
बड़ा दिन बुरा है ये आजकल, अभी मंज़िलें बड़ी दूर हैं !!

ज़रा ख़ुद को तू भी सँभाल ले, ज़रा ख़ुद को मैं भी सँभाल लूँ
अभी दिल मिले ये सँभल-सँभल, अभी मंज़िलें बड़ी दूर हैं !!

अभी तक तो हम मिले ही न थे, अभी मिलके हम हैं चले कहाँ
ये शुरू हुआ है सफ़र असल, अभी मंज़िलें बड़ी दूर हैं !!

यही ज़िंदगी जो सरल भी है, यही ज़िंदगी तो कठिन भी है
इसी ज़िंदगी में हज़ार छल, अभी मंज़िलें बड़ी दूर हैं !!

यूँ तो चल चुके हैं बहुत 'जेहद', हमें फिर भी लगता है ऐसा क्यूँ
कि हैं हम वहीं जहाँ पर थे कल, अभी मंज़िलें बड़ी दूर हैं !!
       ~ जावेद जहद

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