सब किरनों में सबसे प्यारी प्रेम किरन..

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सब किरनों में सबसे प्यारी प्रेम किरन
सबके मन को है ये भाती प्रेम किरन !

ठंडी-ठंडी, मीठी-मीठी  प्रेम किरन
दिल में है ये आग लगाती प्रेम किरन

सूरज की किरनें तो बहुत हैं तेज़ मगर
करती है दुनिया को अंधी प्रेम किरन !

क्या पाओगे ऐ यारो सन-बाथ में तुम
दूर करे है हर बीमारी प्रेम किरन !!

जगमग थी इक महफ़िल लेकिन सूनी सी थी
लहकी तब, जब उसमें चमकी प्रेम किरन !!

रौशन-रौशन इतने सारे चेहरों में है
कितने चेहरों की चिकनाई प्रेम किरन

पहले तो अच्छी लगती है ख़ूब 'जेहद'
फिर ये जीवन भर झुलसाती प्रेम किरन

     ~ जावेद जहद

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