ग़म से कभी हटे,न तो लिपटे ख़ुशी से हम..

         #ताज़ा_ग़ज़ल

ग़म से कभी हटे, न तो लिपटे ख़ुशी से हम
बस आँख ही लड़ाते रहे ज़िंदगी से हम !!

छूते रहे बुलंदियां ख़्यालों के ज़ोर पर
बनते रहे सुख़न के यूँ 'ग़ालिब' 'वली' से हम

शेर-ओ-सुख़न में जान हमारी ग़ज़ल से है
और हैं जमे ग़ज़ल की तो जादूगरी से हम

आदत सी पड़ गई है जो ग़ज़लें सुनाने की
कैसे रहें ज़माने से अब अजनबी से हम ?

उस शह्र के रिवाज से मिलता नहीं मिज़ाज
करते हैं प्यार फिर भी बहुत मुम्बई से हम !

कितनी भी हो सियाही भटक न सकेंगे हम
रौशन हैं ऐसे ईमाँ भरी रौशनी से हम !!

हम से अगर कोई भी हो जाए ख़फ़ा 'जहद'
उसको मना ही लेंगे बड़ी आजज़ी से हम !!

          #जावेद_जहद

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