वो दर्द है दिल में जो कभी कम नहीं होता..
ताज़ा ग़ज़ल
वो दर्द है दिल में जो कभी कम नहीं होता
ऐसा तो किसी का भी कोई ग़म नहीं होता
चारों ही तरफ़ झगड़ा-लड़ाई है जहाँ में
क्यों दूर जहालत का ये आलम नहीं होता
दुनिया की नज़र में वो कभी शेर न बनता
इतना जो भरा उसके यहाँ बम नहीं होता
बेबस है जहाँ सारा सितम वालों के आगे
है कहने की अब बात कि सर ख़म नहीं होता
हर शय की तरह शायरी भी हो गई बेजान
अब शेर में पहले की तरह दम नहीं होता
है उसकी मोहब्बत की हसीं याद मिरे पास
पर साथ मिरे अब तो वो हमदम नहीं होता
उनका नशा तो उनसे बिछड़ के भी 'जहद' जी
कम होता है, पर ख़त्म ये इकदम नहीं होता !!
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