रात भर सांसों में कुछ महका बहुत..

          ताज़ा ग़ज़ल

रात भर सांसों में कुछ महका बहुत
याद आया फूल सा चेहरा बहुत !!

क्या सदा थी वो कि ये दिल मुज़्तरिब
जानिब-ए-दर बारहा लपका बहुत !!

वो मिला ऐसे कि सांसें बढ़ गईं
और दिल भी ज़ोर से धड़का बहुत

उसने जो मुझको दिया पहले-पहल
क़ीमती था प्यार का तोहफ़ा बहुत !

मयकदे से इक तिरे जाने के बाद
साक़िया, लगते हैं सब तन्हा बहुत

मुझमें जाने ऐसी क्या हैं ख़ूबियाँ
याद करती है मुझे दुनिया बहुत

आ भी जाओ अब 'जहद' तुम सामने
छुप-छुपा के हो गया पर्दा बहुत !!
              जावेेद जहद

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