इक शम्मा और परवाने दो..

           ताज़ा ग़ज़ल

इक शम्मा और परवाने दो !
चलो एक को जल जाने दो !

बहुतों को मारा है उसने
अब उसको भी मर जाने दो

सरहद को पंछी क्या जानें
बिन रोके आने-जाने दो !!

बहुत दिनों की प्यास है साक़ी
पैमाने पर पैमाने दो !!

सर बहुत चढ़ाया है उनको
अब दुश्मन को इतराने दो

तुम बाद में दूरी कर लेना
ज़रा पहले पास तो आने दो

जो जिनकी यारी चाहे हैं
उन्हें उनके ही याराने दो

जो बर्बादी के सामाँ हैं
अब दफ़्न उन्हें हो जाने दो

हम सबका स्वागत करते हैं
जो आता है उसे आने दो !

फिर होश मिरा तुम ले लेना
ज़रा पहले होश तो आने दो

दिल जिसको चाहे ख़ूब 'जहद'
उसपे ही उसे लुट जाने दो !!
               जावेेद जहद

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