दिल को लगे हैं छलने लोग..
ताज़ा ग़ज़ल
दिल को लगे हैं छलने लोग
पराए जैसे अपने लोग !!
इन ऊँचे क़द वालों में
कैसे-कैसे बौने लोग !
चोर, लुटेरे, हत्यारे
अब तो लगे हैं बनने लोग
सुनके उसकी तक़रीरें
सब आग लगे उगलने लोग
उसने तरक़्क़ी ख़ुद पाई
और लगे सब जलने लोग
अक्सर तब आता है तरस
लगते हैं जब मरने लोग !!
आए थे यहाँ क्या करने
और लगे क्या करने लोग
हरगिज़ ज़ेब नहीं देते
अच्छे पद पे गंदे लोग
'जहद' किसी का कोई नहीं
और किसी के कितने लोग
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