मैं तुझे फिर से मिलूँ या न मिलूँ..

         #ताज़ा_ग़ज़ल

मैं तुझे फिर से मिलूँ या न मिलूँ
घर तिरा  याद  रखूँ या न रखूँ 

प्यार का क़िस्सा अभी बाक़ी है
मैं उसे  पूरा करूँ  या न करूँ

साथ तेरे  किसी को देखा है
ऐसे मंज़र पे जलूँ या न जलूँ

तुम हसीं थे,  बड़े ही प्यारे थे
सोच कर आह भरूँ या न भरूँ

इक ग़ज़ल तुमपे मुझे कहनी है
सोचता  हूँ कि  कहूँ या न कहूँ

प्यार के पंख लगा कर ओ सनम
चाँद के  पार चलूँ   या न चलूँ

तुझको पाकर जो मैंने खोया है
बैठ कर  हाथ मलूँ  या न मलूँ

ग़म है तेरा तो मेरे दिल को बहुत
रुख़-ए-मयख़ाना करूँ या न करूँ

ये भी इक जहदे-मुसलसल है 'जहद'
मैं सुख़नकार  बनूँ   या न बनूँ ??
             #जावेेद_जहद

Comments

Popular posts from this blog

जब बुरे दिन उमड़ने लगते हैं..

न पूछो ग़ज़ल से मुझे क्या मिला है..

जावेद जहद की पाँच ग़ज़लें..