गीत-संगीत, जाम-ओ-अदा, चाँदनी..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
गीत-संगीत, जाम-ओ-अदा, चाँदनी
कुछ सुना, कुछ पिला, कुछ दिखा चाँदनी
मैं भी आंगन से तुझको निहारा करूँ
तू भी छत से तो मुझको लुभा चाँदनी
तेज़, मद्धम कभी गुमशुदा-गुमशुदा
क्या है तेरा भी ये फ़लसफ़ा चाँदनी
छूना चाहूँ जो मैं छू न पाऊं तुझे
तू भी है इक अजब दिलरुबा चाँदनी
रात आई है काली, छुपा चाँद भी
तू भी जा, पास उसके तू जा चाँदनी
दर्द-ओ-ग़म की तड़प, हिज्र की बेबसी
सामने से मिरे अब हटा चाँदनी !!
मैं न आऊँगा अब तो तिरे जाल में
दिल है तुझसे बहुत छक चुका चाँदनी
चाँद उसका था, वो ले गया ठीक है
मेरे दिल की वो क्यों ले गया चाँदनी
तू कभी थी मिरी ज़िंदगी अब मगर
तेरी फ़ुर्क़त में दम घुट गया चाँदनी
मैं दिवाना तिरा, तू दिवानी मिरी
फिर 'जहद' क्या यहाँ कर रहा चाँदनी
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