तुम न गुलशन के नज़ारे देखो..

       ताज़ा ग़ज़ल

तुम न गुलशन के नज़ारे देखो
गुल, कली, बूटे हमारे देखो !!

सुर्ख़ होंठों की शरारत, शोख़ी
और आँखों के इशारे देखो !!

दिल के दरिया में उतर कर मेरे
जान-ए-मन अब न किनारे देखो

इतने दीवाने जो बनते हो मिरे
कोई पत्थर से न मारे देखो !!

कौन थामेगा तुम्हें प्यार से यूँ
मेरी बाँहों के सहारे देखो !!

छोड़ो ये आसमाँ की सुंदरता
चाँद और तारे हमारे देखो !!

देखना है जो सनम अब तुमको
मेरी नज़रों के सहारे देखो !!

आज की रात नशीली है बहुत
होश न बहकें तुम्हारे देखो !!

हैं 'जहद' इश्क़ की भी शर्तें कुछ
दिल कोई शर्त न हारे देखो !!

    ~जावेद जहद
करन सराय,सासाराम, रोहतास, बिहार

Comments

Popular posts from this blog

जब बुरे दिन उमड़ने लगते हैं..

न पूछो ग़ज़ल से मुझे क्या मिला है..

जावेद जहद की पाँच ग़ज़लें..