दिल बहुत घबरा रहा है आजकल..

    ताज़ा ग़ज़ल

दिल बहुत घबरा रहा है आजकल
याद कोई आ रहा है आजकल !!

कैसी-कैसी है मुसीबत आ रही
होता क्या-क्या जा रहा है आजकल

कल तलक जो भी यहाँ देखा नहीं
वो समाँ दिखला रहा है आजकल

जाने कब अच्छा ज़माना आए गा
दिन बुरा ही आ रहा है आजकल

नाम शोहरत, माल-ओ-ज़र और ऐश का
सबको ही ग़म खा रहा है आजकल !!

यूँ तो है वो सीधा-साधा सा मगर
रंग क्या दिखला रहा है आजकल

आजकल बहका हुआ है साक़िया
लब से लब टकरा रहा है आजकल

क्या वजह है ये जहाँ सारा 'जहद
गर्दिशों में आ रहा है आजकल !!

     ~जावेद जहद
करन सराय,सासाराम, रोहतास, बिहार

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