चश्म-ए-गिर्या से तो दामन को भिगोना होगा..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐 चश्म-ए-गिर्या से तो दामन को भिगोना होगा अपने आमाल ही ऐसे हैं कि रोना होगा !! बिखरे जाते हैं बशर नफ़रतों की आँधी में फिर इन्हें प्यार के धागे में पिरोना होगा !! भर गई बदनुमा दाग़ों से ये दुनिया इतनी सबको ही मिलके इसे ख़ूब ही धोना होगा ख़ुशनुमा चाहते हो देखना गर दुनिया को ख़्वाब कुछ ख़ुशनुमा आँखों में संजोना होगा क्या तलातुम है मोहब्बत के समंदर में सनम पार होगी मिरी कश्ती कि डुबोना होगा ? उस करम को भला मैं कैसे भुला पाऊंगा जो करम तेरी निगाहों का सलोना होगा ! चाहता हूँ कि हर इक चीज़ यहीं मिल जाए सोचता हूँ कि मगर सब यहीं खोना होगा ! फ़िक्र क्या करते हो हर वक़्त ज़माने वालो बस वही होगा जो तक़दीर में होना होगा ! दिन ये कहता है कि बस भागते ही जाओ 'जेहद' रात कहती है कि ऐ जान तुझे सोना होगा !! #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया